JDK (Java Development Kit)

जावा डेवलपमेंट किट एक सॉफ्टवेर डेवलपमेंट का वातावरण है जिसके अंतर्गत जावा एप्लीकेशन तथा एप्लेट बनाये जा सकते हैं. JDK में निम्नलिखित टूल्स शामिल होते हैं :

  • JRE (Java Runtime Environment)
  • जावा कम्पाइलर (javac)
  • जावा इंटरप्रेटर (java)
  • जावा आर्काइव (jar)
  • डॉक्यूमेंट जनरेटर (javadoc) आदि.

JVM (Java Virtual Machine)

जावा में बनाये गए प्रोग्राम को कम्पाइल कर उसे बाइट कोड में परिवर्तित किया जाता है. क्यूंकि माइक्रो प्रोसेसर केवल बाइनरी कोड को ही एग्ज़ीक्यूट कर सकता है इसलिए JVM का प्रयोग कर के बाइट कोड को बाइनरी कोड में परिवर्तित किया जाता है. यह बाइनरी कोड अलग अलग प्लेटफ़ॉर्म के अनुसार अलग अलग होना चाहिए. उदाहरण के लिए विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम पर बाइनरी कोड अलग बनेगा जबकि लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर बाइनरी कोड अलग बनेगा. अतः हम यह कह सकते हैं की अलग अलग ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए उस ऑपरेटिंग सिस्टम से सम्बंधित अलग JVM का प्रयोग किया जाता है.

JRE (Java Runtime Environment)

जावा रन टाइम एनवायरमेंट जावा एप्लीकेशन बनाने के लिए कुछ सॉफ्टवेर टूल्स का संग्रह होता है. यह JVM, जावा क्लासेज तथा अन्य लाइब्रेरी का सेट होता है. JRE, JDK का ही हिस्सा होता है. हालाँकि इसे अलग से भी डाउनलोड किया जा सकता है. इसे संक्षेप में जावा रन टाइम भी कहते हैं.

JIT (Just In Time) Compiler

JIT कम्पाइलर के आने से पहले जावा में बने किसी प्रोग्राम के मैथड को यदि 5 बार कॉल किया जाता था तो 5 बार ही उस मैथड के बाइट कोड को बाइनरी कोड में परिवर्तित किया जाता था. JIT कम्पाइलर के आने के बाद इस मैथड को केवल एक ही बार बाइनरी कोड में परिवर्तित किया जाता है तथा जब भी उस मैथड को कॉल किया जाता है तो वही बाइनरी कोड रन करा दिया जाता है. JIT कम्पाइलर के आने से जावा के प्रोग्राम्स की एग्ज़ीक्यूशन स्पीड काफी बढ़ गयी. JIT कम्पाइलर अपने नाम के विपरीत कम्पाइल टाइम पर कार्य करने के बजाय रन टाइम पर कार्य करता है.

सुझाव / कमेंट